Thali केन्या के एक गांव की कहानी है. थाली सब्द से आप लोग जरूर समझ गए होंगे. हमारे यहाँ जब भोजन करने के लिए जिस पत्र में भोजन दिया जाता है उसे थाली कहा जाता है.

अफ्रीका में अभी भी ऐसे गांव है जहा कितनो को भूखे या आधे पेट खाना खाके सोना पड़ता है. आज भी वह अधिकतर आबादी तक सही से साफ पानी या अच्छी हॉस्पिटैलिटी की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

Thali

ऐसे ही एक गांव के छोटे से होटल की कहानी है. जो दिल को काफी सुकून दिला देती है. एकबार एक शहरी सज्जन गांव में आता है. और एक होटल में खाना खाने के लिए जाता है.

थाली की इम्पोरेन्ट कुछ लोगो के लिए बहुत महत्त्व रखती है

जैसे ही वो होटल में जाता है खाना आर्डर करता है तभी वहा आर्डर लेनेवाला पूछता है कितना Thali आर्डर लिखूं. तब वो शहरी व्यक्ति बोलता है एक Thali केवल। वो वेटर दुबारा पूछता है केवल

एक Thali. तब फिर से सहरी आदमी ने बोला मै अकेला आया हूँ तो एक ही आर्डर करूँगा न. तब वो आर्डर ओके सर कह के चला जाता है.

शहरी व्यक्ति खाना खाता रहता है तभी एक आदमी होटल में आता है. वेटर उसके पास जाता है और आर्डर पूछता है. तब वो आदमी बोलता है २ थाली एक मुझे और एक उस दीवार पे. वेटर ओके

सर कह के चला जाता है. तब वेटर एक Thali का भोजन उसे परोसता है और दूसरा उस दीवार के पास जाके एक पर्ची लगा देता है. जहा पे आलरेडी बहुत से पर्ची लगे होते हैं.

कर्म से ही इंसान छोटा या बड़ा बनता है

थोड़ी देर बाद एक औरत आती है और उसके उसके साथ २ छोटे बच्चे रहते हैं. बहुत ही गंदे कपडे फटे हुए और पैर में चप्पल तक नहीं रहता है. देखने से ही काफिर गरीब रहते हैं. वेटर आता है

और पूछता है क्या चाहिए वो बोलती है २ Thali एक मेरे लिए और एक मेरे दोनों बच्चों के लिए. वेटर बोलता है पैसे हैं. तो वो औरत बोलती है नहीं मुझे उस दीवार से चाहिए. तब वो वेटर बोलता है

ठीक है बैठो मई लाता हूँ.

ये दृश्य देख के उस आदमी के आँखों में आशु आ जाते हैं और दिल में सोचता है इंसानियत आज भी बस उसको जिन्दा रखने की जरुरत है. वो आदमी जाते समय १० थालियों का आर्डर उस दीवार

को देके चला जाता है.

कहानी से सिख

इस कहानी से यही सिख मिलती है की इंसानियत हर किसी के अंदर होती है. लेकिन उसको ऊपर लानेवाला चाहिए. इंसानियत ऊपर किसी के अच्छे विचारों को देखकर भी आ सकती है. जैसे ना

चाह के भी कुछ अच्छा करने को तत्पर हो जाता है.