कई सौ साल पहले की कहानी है एक Samrat की. एक सम्राट अपनी प्रजा को हमेसा खुश देखना चाहता था. इसलिए वो नगर और गाओं का चौतरफा लिए बहुत से स्किम लागु किये. सम्राट कोई भी कार्य सुरु करने से पहले अपने विश्वशनीय सलाहकार से जरूर परामर्श करते थे. हमेसा की तरह दरबार लगता था. लेकिन एकबार ऐसी घटना हुई की सम्राट को सोचने पे विमर्श कर दिया.

Samrat Ki Kahani- Jivan se sikh

Samrat

एकबार दरबार में Samrat ने एक व्यक्ति से पूछ की क्या हमरी तरफ से जारी की गए योजनए तुम्हे मिली की नहीं. तब वो आदमी कुछ नहीं बोल पाया सम्राट ने दुबारा पूछा तब उस आदमी ने झिझकते हुए जबाब दिया की साहब हमको तो कुछ पता नहीं की आपकी तरफ से कौन कौन सी योजनाए हैं. हम तो रोज कमाते हैं और जो मजदूरी में मिलता है उसी से परिवार चलता हूँ परिवार का पालन पोषण करता हूँ. साहब हमको क्या दुनियादारी का पता.

Samrat उस नागरिक की बाटे सुनकर आश्चर्य चकित हो गए. और उन्होंने दरबार में आये आपबीती सुनाने वाले सभी लोगो से पहले अपने योजनाओं के बारे में पूछना सुरु किया. लेकिन सभी को योजनाओ के बारे में कुछ पता नहीं नहि उसका कोई फायदा मिला. तब सम्राट ने फैसला लिया की अब वो खुद नगर और गांव गांव जाके लोगो का हालचाल लेंगे। दूसरे दिन सम्राट आम नागरिक का वेस बदलकर नगर घूमने का फैसला लिया।

सम्राट का निर्णायक फैसला

वो नगर की ओर प्रस्थान करते हैं और सबसे पहले एक गरीब महिला से मुलाकात होती है. सम्राट उस गरीब महिला का हालचाल लेके उसके घर की ओर चल दिए. सम्राट जैसे ही उस महिला की घर की ओर चलने लगे तभी उस महिला ने कहा, कुछ काम दिला दो. जहाँ भी आप काम करते होंगे.

Samrat ने कहा ठीक है माताजी मै जरूर कोसिस करूँगा आपको काम दिलाने के लिए. सम्राट उस महिला के घर गए उस महिला के दो छोटे बच्चे थे जिनके सरीर पे कोई कपडे नहीं थे. उस महिला ने का है कहा हमारे पास कुछ नहीं है न खाने को न पहनने को. वो महिला एक लकड़ी के टूटी फूटी झोपड़ी में रहती थी. सम्राट ये सब देख के वहा से चले गए.

आगे जाके एक आदमी से मुलाकात हुई. Samrat एक बहुत ही गरीब आदमी की वेशभूसा में थे. वो आदमी सम्राट को देख के थोड़ा अलग तरह से व्यवहार कर रहा था. सम्राट ने उस आदमी से कहा साहब कुछ काम मिल जायेगा मेरा परिवार कई दिनों से भूखा प्यासा है. तब उस आदमी ने कहा हमारे पास कोई काम नहीं है. सम्राट ने कहा साहब आप देखने से बड़े आदमी लग रहे हो अगर कुछ काम दे दें तो आपका बहुत भला होगा.

सम्राट का नगर भ्रमड़

तब उस आदमी कहा ठीक है हमारे आ जाना काम मिल जायेगा. तब सम्राट बोले ठीक है. सम्राट उसके घर गए उस आदमी ने कहा तुमको घर की साफ सफाई करनी होगी काम नगदी या अनाज मिल जायेगा. सम्राट ने देखा उसके पास काफी जमीन जायदात थी. दूसरे लोगो से १०० गुना ज्यादा.

सम्राट ने देखा उनके कार्ययोजनाओं का जमीनी अस्तर पे कुछ भी कार्य नहीं हुआ था. लोगो का हल देख के उनको पता लगा की आखिर सच में लोगो को क्या चाहिए और उनके जारी किये योजनाओ का कितना अमल हो रहा है.

सम्राट महल वापस लौटते ही अपने कार्य योजनाओं में बदलाव किया। उन्होंने जरूरतों के हिसाब से योजनाएं तैयार की. योजनाओं में सबसे पहले जिनके पास काम नहीं उनको ज्यादा से ज्यादा रोजगार प्रदान करने की प्रतिबद्धता. दूसरा नगर और गांव में जो भी अमीर लोग हैं जिनके पास आम लोगो से १० गुना से भी ज्यादा जमीन है उनकी जमीन सिमित करके बचे गरीब लोगो को देने का फैसला किया.

योजनाओं को जमिनीतौर पे उतारा और लोगो तक पहुंचाया. गांव और नगर के लोग काफी खुश रहने लगे. सम्राट का लोगो के दिल में और भी जगह बन गयी. लोग अपने सम्राट को भगवन की तरह मानने लगे. सम्राट भी लोगो की खिशियों के लिए निरंतर कार्यरत रहे.

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