Time हरचीज का होता है. चाहे वो घड़ी का Time हो या जिंदगी का. Time के साथ बदलाव होता है. इसी Time के घड़ी में जिसने सभी बाधाओं को पार कर लिया एक न एक दिन उसे सफलत

जरूर मिलती है. कहानियां हमेसा लोगो के लिए मनोरंजक, किसी नयी चीजों की व्याख्या, या कहे कुछ अनसुलझी किस्सों से भली भाती परिचित हो जाते हैं. कहानियां हमें ड्रामेटिक Movie, ड्रामा

के माध्यम से भी लोगो का entertainment कराती है. कहानियां अधिकतर काल्पनिक होने बावजूद एक नयी दिशा, नयी सिख या नया कल्चर और पुराने कल्चर बयां करती है.

Time

हिंदी कहानियों के स्वरुप को उपन्यास का सारांश कहा जाता है. हिंदी कहानियों के कई प्रकार देखने को ,मिलते हैं. अधिकतर लोगों शिक्षाप्रद, लव स्टोरी, प्रेरणादायक कहानियां पसंद करते हैं.

कहानियां छोटे बच्चो को आत्मविश्वास और एक समझ की भावना पैदा करती है. सही गलत का परिचय कराती है. अगर किसी भी चीज की व्याख्या कहानी रूप में की जाये तो वो दिमाग में काफी

जल्दी बैठ जाती है.

ऐसी ही एक दिल को छू लेनेवाली कहानी जो एक सच्ची मानवता को जन्म देती है.

Time समय का खेल Kahani in Hindi

एक ऐसे गरीब परिवार की कहानी बयां करने हूँ जिसकी story से हमको एक बहुत बड़ी सिख मिलती है. एक बार की बात है एक गांव में एक परिवार रहता था. उस परिवार सुरेंद्र था जिसकी पत्नी

और उसकी मां रहती थी.

परिवार इतना गरीब था की उसको एक समय के खाने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ता था. क्योकि कुछ समय पहले सुरेंद्र ने एक रोड एक्सीडेंट में अपने पैर गवा चूका था. अपंग होने के वजह से

वो ज्यादा कुछ नहीं कर पता था. माँ भी हमेसा बीमार रहती थी. उसकी पत्नी कैसे भी करके दूसरे के घरों में बर्तन धोके एक समय के खाने का इंतजाम करती थी.

परिवार में नए सदस्य का आगमन

Time बीतते गया कुछ दिन बाद उसके घर में एक लड़के का जन्म हुआ. परिवार में मानो खुशियां सी आ गयीं। बहुत दिनों बाद परिवार में एक नया सदस्य जुड़ जाने से परिवार के सभी लोग बहुत

ही खुश थे. सभी के अंदर मनो एक बुझते दिए को फिर से किसी ने उजाला कर दिया.

सुरेंद्र की खुशियों का तो ठिकाना ही नहीं था. अपंग होने के बाद भी उसको ऐसा लगने लगा था जैसे उसके पैरो में फिर से जान आ गयी. माँ बच्चे की परवरिश के लिए और भी मेहनत करने लगी.

सुरेंद्र भी छोटे मोटे काम करने लगा जिससे वो अपनी पत्नी और परिवार को और सहयोग दे सके.

बच्चा धीरे धीरे बड़ा होने लगा. सुरेंद्र ने बच्चे का नाम मोहन रखा था. मोहन के अंदर एक अलग ही छवि दिखाई दे रही थी. वो सभी बच्चों से बिलकुल अलग था. उसके तेज दिमाग को देखकर सुरेंद्र

ने ठान लिया की वो मोहन को बहुत पढ़ायेगा। उसको जितना होगा अच्छी से अच्छी शिक्षा देगा चाहे भले कुछ भी करना पड़े.

मोहन ने पढ़ाई में टॉप किया

मोहन की रूचि भी पढ़ने में बहुत थी. मोहन ने १०th की परीक्षा में पुरे स्टेट में टॉप किया. मोहन ने पूरा श्रेय अपने माता पिता को दिया।

सुरेंद्र का सपना था की वो अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिला कर अधिकारी बना लोगो की सेवा कर सके. मोहन ने आगे जाकर अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. सुरेंद्र अपने बेटे को अधिकारी बनाने के लिए

जी जान से लग गया. मोहन भी माँ बाप के सपनो को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करने लगा.

Mohan सोच रहा था की शहर जाके तैयारी के साथ साथ कुछ काम भी कर सके और घरवालों सपोर्ट कर सके. शहर जाके वो काम की तलाश में लग गया. काम नहीं मिला फिर उसने रिक्शा

चलाना सुरु कर दिया. रिक्शा चलाने के साथ साथ अपनी तयारी जारी रखा.

मोहन का Civil services में selection

Mohan ने पहले ही अटैम्पट में सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली. वो अधिकारी बन गया. मोहन ये खुशखबरी अपने पिता और माता को देने के लिए बहुत उतावला था. वो सबको

surprise देने वाला था.

गांव जाने के बाद वो घर पहुंचते ही सबसे पहले उसने अपनी मन के पैर छुए फिर अपने आसुओं से माँ के पैरों को धोने लगा. रट हुए वो कहता रहा बहुत ही खुश नसीब है जो ऐसे माँ बाप उसे मिले.

ये सब देख माँ बाप के भी आंसू रुक ना सके.

अब घड़ी आ गयी थी की वो खुशखबरी घरवालों को दे सके. पिताजी और माता से मिलाने के बाद बोला की अब उन्हें हर ख़ुशी देगा जो उन्हें नहीं मिल सकी. जब उसने बोला की वो अब अधिकारी

बन गया है उसने पहलीबार में ही परीक्षा पास कर ली. ये सुनके सुरेंद्र और उसकी माँ के आँखे और नम हो गयी. और दोनों लोग बेटे को लिपट गए.

ये दिन उनके परिवार का सबसे खूशीवाला दिन था उनकी जिंदगीभर की मेहनत रंग लायी. आगे जाके वो बहुत ख़ुशी से जिंदगी जीने लगे.

कहानी से सिख

इस कहानी से यही सिख मिलती है की इंसान कितना भी गरीब हो अगर वो अपनी कठिनाईओं का डट के सामना करते रहे तो उसका फल एक न एक दिन जरूर मिलता है. मुश्किलों से कभी

भागना नहीं चाहिए. बल्कि उससे सिख लेना चाहिए.